मस्त विचार 2493
हमसे खेलती रही दुनिया ताश के पत्तों की तरह,
जिसने जीता उसने भी फेका, जिसने हारा उसने भी फेका.
जिसने जीता उसने भी फेका, जिसने हारा उसने भी फेका.
_ और उसका हो भी नहीं सकता ..
तब वो आपसे नफरत करने लग जाते हैं.
तनहाई सौ गुना बेहतर है मतलबी लोगों से…!!!
और जमाना औरों से मिलने का इलज़ाम लगा गया…
ना जाने घर में कितनों का हौसला हूँ मैं.