मस्त विचार 2581
मिलोगे हमसे तो कायल हो जाओगे,
दूर से देखने पर हम ज़रा मग़रूर दिखते हैं.
दूर से देखने पर हम ज़रा मग़रूर दिखते हैं.
एक दिन “हँसा” कर महीनों “रुलाती” है !
जहां से चले थे फिर वहीँ आ गए हम..
कोई मेरा रास्ता रोकने की कोशिश कर सकता है…
लेकिन मेरी मंजिल और काबिलियत नहीं….
और शाम होते-होते, मेरा आज भी चला गया.
. . .
यूँ देखती है जैसे मुझे जानती नही….!!