मस्त विचार 4708
*”सागर”* *तो…..ख़ामोश है,*
*मगर…लहरों को…सुकून क्यूँ नहीं_____*
*मगर…लहरों को…सुकून क्यूँ नहीं_____*
किसी की कहानी में शायद मैं भी गलत हूँ….
बज तो रहा है मगर ….फिर भी बेआवाज़ है….
रोज नही तो उस पल हम याद तुम्हे आएंगे..
गर वो रोये तो उन्हे कौन हंसाता होगा।!!
कि बात किसी से भी करूँ…. ख्याल तेरा ही आता है ….!!