मस्त विचार 4758
“जो गिर जाए ऊंचाई से, समझना ऊंचाई पर पहुंचा ही न था।””
ऊंचाई पर तुम जब पहुंचते हो, तो वही से वापस गिरना नहीं होता_ जो सीख लिया, सीख लिया.
ऊंचाई पर तुम जब पहुंचते हो, तो वही से वापस गिरना नहीं होता_ जो सीख लिया, सीख लिया.
हम तुम्हे खुश देख कर मुस्कुराते हैं.!!
तब समझ में आया कि मैं भी किसी से कम नहीं.
मौजूदगी की क़दर किसी को नहीं..
तुम आने से रहे और हम अब बुलाने से रहे…
पर सवाल यह है की सुख को ताला लगाया किसने है..