मस्त विचार 4724
बहोत कुछ जोड़ लिए थे हम भी झूठ- मुठ का,
इसलिए बिखराव का होना भी जरूरी था.
इसलिए बिखराव का होना भी जरूरी था.
जो काँटे बोकर जमी से गुलाब मांगते हैं.
और इससे नीचे नहीं आने वाला..
इज़्ज़त से जो मिल जाये वो कतरा ही बहुत है,,
बस जो भी हुँ अपने दम पर हुँ ” यही मेरे लिए काफी है “
उन्हें खटखटाने की ताकत रखते हैं….!!