मस्त विचार 2439
शब्दों के इत्तेफाक़ में यूँ बदलाव करके देख..
तू देख कर न मुस्कुरा बस मुस्कुरा के देख..
तू देख कर न मुस्कुरा बस मुस्कुरा के देख..
जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती..
और मेरी निग़ाहें हैं, सूरज के ठिकानों तक.
बदले में ज़िन्दगी की हर ख़ुशी तबाह की है…
ये तो ज़िन्दगी है जो समझदार बनाती जा रही है.