मस्त विचार 2374
ज़िन्दगी जब भी लगा कि तुझे पढ़ लिया,
तभी तूने एक और पन्ना खोल दिया…
तभी तूने एक और पन्ना खोल दिया…
हम बड़े हुए तो क्या, थोड़ा हमें भी बच्चों सा सुकून दे दे.
जिन पर चढ़ कर कभी तुम दुनिया देखा करते थे…
मेरे अपने ही हर दिन मुझको थोड़ा- थोड़ा काटते रहे…
कुछ पराये अपने हुए, कुछ अपनों का रंग बदलता रहा…
एक वो जिनकी उम्र अधिक है,
दूसरे वो जिसने कम उम्र में ही बहुत सी ठोकरें खायी हैं…