मस्त विचार 2195
जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया,
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। …!!!
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। …!!!
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे…!!”
“बङे हो कर क्या बनना है ?”
जवाब अब मिला है, – “फिर से बच्चा बनना है.
वर्ना मेरे वादे भी कभी जंजीर हुआ करते थे.
इससे अच्छी आदत क्या होगी मेरी…
किसी के दिल का दर्द छीन लूँ….
इससे अच्छी नियत क्या होगी मेरी.
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!