मस्त विचार 2243
मैने भी अपनी जिन्दगी का दूर तक पीछा किया,
ये अलग बात है कि वो भी किसी मंजिल की तलाश मे थी..
ये अलग बात है कि वो भी किसी मंजिल की तलाश मे थी..
. बस इतनी सी बात. समंदर को खल गई~~
. एक काग़ज़ की नाव. मुझपे कैसे चल गई ~
_ समझ लो कि हम, काँटों से घिर गए गुलाब हैं.
और जब पलटती है, तब पलटकर रख देती है.
इसलिये अच्छे दिनों मे अहंकार न करो …….
.लोग आपको दिल से याद करे तो समझ लेना आप पास हो गए.
कुछ कहा मैंने,
पर शायद तूने सुना नहीँ..
तू छीन सकती है बचपन मेरा,
पर बचपना नहीं..