मस्त विचार 2357
मुझे गिरते हुए पत्तों ने यह समझाया है
बोझ बन जाओगे तो अपने भी गिरा देते हैं.
बोझ बन जाओगे तो अपने भी गिरा देते हैं.
..ये यादों का बोझ कितना भारी होता है..
मैं तो जिंदगी आज भी अपने अंदाज में जीता हूँ.
लौट कर फूलों मे खुशबू नही आने वाली.
क्यूंकि ख़ाली बर्तन ही ज़्यादा आवाज़ करते हैं.
ये मंजिल है काैन सी, न वाे समझ सके न हम.?