मस्त विचार 2183
खुद ही रोए और रो कर चुप हो गए,
यही सोचकर की काश कोई अपना होता तो रोने ना देता.
यही सोचकर की काश कोई अपना होता तो रोने ना देता.
“आपको गिरने का डर नही लगता ?
परिन्दे ने क्या गजब का जवाब दिया,
”मै इन्सान नही
जो ज़रा सी ऊँचाई पा कर अकड़ जाऊ..
प्यास लगी थी गजब की…मगर पानी मे जहर था…
पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते.
हमारे भरोसे के तो सारे पत्ते जोकर निकले.
तू है पुजारी कर्म का
थोडा तो इंतज़ार कर
विश्वास को दृढ़ बना
संकल्प को कृत बना
एक कोशिश और कर बैठ न तू हार कर.
मिले जो कामयाबी सारे रिश्ते बोल पड़ते हैं.
मेरी खूबी पे रहते हैं यहां अहले ज़बान खामोश,
मेरे ऐबों पे चर्चा हो तो गूंगे बोल पड़ते हैं.