मस्त विचार 2345
ना साथ है किसी का न सहारा है कोई,
न हम हैं किसी के न हमारा है कोई.
न हम हैं किसी के न हमारा है कोई.
न कि ऐसी ज़िन्दगी जैसे की दूसरे मुझसे उम्मीद करते थे.”
not the life others expected of me.“
खुशी क्या है यह एहसास ना रहा…..
देखा है इन आँखो ने टूटे सपनो को,…
इसलिए अब किसी का इंतेज़ार ना रहा…!!
दोस्त मुझे तरक्की के किस्से सुनाने लगे.
हमदर्द नहीं कोई, इंसान बहुत हैं;
दिल के दर्द सुनाएं तो किसको;
जो दिल के करीब है, वो अनजान बहुत है !!
मेरे होठों को इजाजत नहीं..तेरे खिलाफ बोलने की.