मस्त विचार 2147
ख्वाब मंजिल के मत दिखाओ मुझको,
कहां तक साथ चलोगे ये बताओ मुझको.
कहां तक साथ चलोगे ये बताओ मुझको.
लेकिन उस के पहले हमें आसमान छू कर देखना है,
…..जिंदगी भी यही चाहती है.
लोगों को भी पता चले आखिर जिन्दगी होती क्या है…
जाने फिर क्यों लोग मुझे मगरूर समझते हैं.
किसी को कहकर अपना बनाया नही जाता.