मस्त विचार 2303
आए थे तेरे दीद को, बे दीद हो चले.
चौखट को तेरी चुम के, तेरे मुरीद हो चले.
चौखट को तेरी चुम के, तेरे मुरीद हो चले.
कहीं ये तुम तो नहीं…
तो उसका आपसे बात करने का तरीका भी बदल जाता है.
जब हम अपनी महत्वक्षानुसार कर्म ( सफल होने के लिए परिश्रम ) नहीं करते तो बर्बाद होना तो निश्चित है !
अपनी चादर देखकर जो पाँव फैलाते रहे.
मगर अच्छे रिश्ते और अच्छे दोस्त कभी नही बदलते.