मस्त विचार 2280
कितना रोया था मैं तेरी खातिर,
अब जो सोचता हूँ, हंसी आती हैं.
अब जो सोचता हूँ, हंसी आती हैं.
तेरी मीठी याद में नाचे मन मेरा मतवाला.
कोई जी लेता है ज़िंदगी, किसी की कट जाती है जिन्दगी”….
इसीलिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते.
यकीन नहीं होता इन्होनें कभी कश्तियाँ डूबाई होंगी.
मगर स्वभाव में ग़ुरूर खलता है..