मस्त विचार 2336
बिना विश्वास के आदमी ऎसा है
जैसे बिना स्याही का फाउण्टेन पेन.
जैसे बिना स्याही का फाउण्टेन पेन.
कि तेरे शहर की मिट्टी भी मेरे वज़ूद को तरसेगी..
कोई सुनता तो हम भी कुछ कहते..
पैगाम लिखते-लिखते ख्वाब याद आ गए,
मिलने कि तमन्ना थी आपसे,
लेकिन आँसू में आप नज़र आ गए,
_ इसका अर्थ है कि आपने कमियों के परे देखना शुरू कर दिया है..
उतना ही सुरक्षित महसूस करता हूँ.