मस्त विचार 2244
तुझे देखूँ तो एहसास होता है…
ज़िंदगी का एहसान है मुझ पर…
ज़िंदगी का एहसान है मुझ पर…
ये अलग बात है कि वो भी किसी मंजिल की तलाश मे थी..
. बस इतनी सी बात. समंदर को खल गई~~
. एक काग़ज़ की नाव. मुझपे कैसे चल गई ~
_ समझ लो कि हम, काँटों से घिर गए गुलाब हैं.
और जब पलटती है, तब पलटकर रख देती है.
इसलिये अच्छे दिनों मे अहंकार न करो …….
.लोग आपको दिल से याद करे तो समझ लेना आप पास हो गए.