मस्त विचार 2330
दुनियां धोखा देकर अक्लमंद हो गई…
और हम भरोसा कर के गुनेहगार हो गए.
और हम भरोसा कर के गुनेहगार हो गए.
बिन ज़रुरत तो हीरे भी, तिजोरी में रखे रहते हैं.
पर हमारे काम से हमारी बातें जरूर होती हैं…
मगर ऊपर वाले ने ज़िम्मेदारी उठा रखी है हमे हँसाने की.
और एक हमसफर वो जो चंद लम्हो में पूरी जिंदगी दे जाये”