मस्त विचार 2238
ऐ उम्र !
कुछ कहा मैंने,
पर शायद तूने सुना नहीँ..
तू छीन सकती है बचपन मेरा,
पर बचपना नहीं..
कुछ कहा मैंने,
पर शायद तूने सुना नहीँ..
तू छीन सकती है बचपन मेरा,
पर बचपना नहीं..
“दुनिया” वालो की पसंद तो पलभर मे बदल जाती है।।”
बस सामने वाले को आपसे कोई काम पड़ना चाहिये….. . . . . . .
अब यही लोग न मिलने का सबब पूछते हैं.
_ पिछली रुत के बिछड़े साथी याद आते हैं..
_ मैंने हर बार _मिलने को याद रखा.._ आपने हर बार बिछड़ने को..!!
हम तो तेरे यार हैं…..
न हार की फिकर करते हैं और न जीत का जिक्र करते हैं.