मस्त विचार 2064
चले तो थे हम अकेले, कारवां बनता गया.
कोई राहबर बना तो कोई पलट गया.
कोई राहबर बना तो कोई पलट गया.
उस को ख़ुश रहना भी आए ये जरुरी तो नहीं.
उसने तब – तब धोखा दिया.
परेशान वो हैं जिनके घरों में भरे हुए तहखाने हैं.
जीतने की इच्छा कभी मत करना.