मस्त विचार 2230
-बार बार रफू करता रहता हूँ, …जिन्दगी की जेब !!
कम्बखत फिर भी, निकल जाते हैं…,खुशियों के कुछ लम्हें !!
कम्बखत फिर भी, निकल जाते हैं…,खुशियों के कुछ लम्हें !!
मुश्किल है ऐसा शख्स ढूँढना, जो उस समर्पण का हक़दार हो.
दर्जा तुम्हारा यकीनन खुदा का हो चला है…
तेरे खिलाफ हरेक बेजबान बोलेगा…
हमारी चीख कभी बेअसर नहीं होगीं,
ज़मीं खामोश सही आसमान बोलेगा…
तरीका तुमने बदला तो, सलीका हम बदल बैठे.
बस अंतर तो सिर्फ इतना है कि
तकदीर के फैसले हमें पसंद नहीं आते
और हमारे फैसले तकदीर पसंद नहीं करती…