मस्त विचार 2197
छोटी छोटी बातों को बड़ा न किया करें,
उससे भी ज़िन्दगी छोटी हो जाती है.
उससे भी ज़िन्दगी छोटी हो जाती है.
और “किस्मत” महलों में राज करती है!!
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। …!!!
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे…!!”
“बङे हो कर क्या बनना है ?”
जवाब अब मिला है, – “फिर से बच्चा बनना है.
वर्ना मेरे वादे भी कभी जंजीर हुआ करते थे.