मस्त विचार 2017

हमने रिश्तों पे जान वारी थी, सच कहा है खता हमारी थी.

सत्य के दुर्दिनों की मत पूछो, झूठ की आरती उतारी थी.

कुल मिलाकर है बात इतनी सी, सबको अपनी ख़ुशी ही प्यारी थी.

हमने सब कुछ ख़ुदा पे छोड़ा था, फिर तो उसकी जबाबदारी थी.

राज गद्दी थी किसकी क़िस्मत में, किसकी क़िस्मत में जाँ निसारी थी.

हाय हमको भी क्या भरोसा था, मानते हैं ये भूल भारी थी.

मस्त विचार 2016

कुछ लोग तो आपसे सिर्फ. इसलिए भी नफरत करते हैं

क्योंकि, बहुत सारे लोग आपसे प्यार करते हैं…

मस्त विचार 2015

हसरतें दिल की सब मेरी जुबां पर आने लगी.

देख के तुमको ये जिंदगी मुस्कुराने लगी.

ये इश्क़ की इन्तेहां है या दीवानगी मेरी

हर सूरत में सूरत तेरी नजर आने लगी.

मस्त विचार – अगर तुम मिलने आ जाओ – 2012

तमन्ना फिर मचल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ

यह मौसम ही बदल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ
मुझे गम है कि मैने जिन्दगी में कुछ नहीं पाया
ये ग़म दिल से निकल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ
नहीं मिलते हो मुझसे तुम तो सब हमदर्द हैं मेरे
ज़माना मुझसे जल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ
ये दुनिया भर के झगड़े, घर के किस्से, काम की बातें
बला हर एक टल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ.
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