मस्त विचार 2179
एक कोशिश और कर बैठ न तू हार कर
तू है पुजारी कर्म का
थोडा तो इंतज़ार कर
विश्वास को दृढ़ बना
संकल्प को कृत बना
एक कोशिश और कर बैठ न तू हार कर.
तू है पुजारी कर्म का
थोडा तो इंतज़ार कर
विश्वास को दृढ़ बना
संकल्प को कृत बना
एक कोशिश और कर बैठ न तू हार कर.
मिले जो कामयाबी सारे रिश्ते बोल पड़ते हैं.
मेरी खूबी पे रहते हैं यहां अहले ज़बान खामोश,
मेरे ऐबों पे चर्चा हो तो गूंगे बोल पड़ते हैं.
कोई जब पूछे कैसे हो…?? तो मजे में हूँ कहना पड़ता है…
आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ
या काम करने के लिए जीता हूँ.
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया….
अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. ……
पैगाम लिखते-लिखते ख्वाब याद आ गए,
मिलने कि तमन्ना थी आपसे,
लेकिन आँसू में आप नज़र आ गए,