मस्त विचार 1999
आस्तिक हूँ……कभी नास्तिक हूँ…
पर…जितना भी हूँ…..वास्तविक हूँ.
पर…जितना भी हूँ…..वास्तविक हूँ.
मुझे यूँ सहूलियत के हिसाब से किराये पर मत लिया करो.
मकान खड़े रहते हैं बेशर्मों की तरह.
फूलों ने मचाई भी भीड़ तो आ के मजार पर.
ऐ खुदा…एक तेरा ही दर है, जहां कभी ताना नहीं मिला.