मस्त विचार 2200
सपने देखो और उन्हें पूरा करो,
आँखों में उम्मीद के ख़्वाब भरो.
अपनी मंजिल खुद तय करो,
इस बेदर्द दुनिया से मत डरो.
आँखों में उम्मीद के ख़्वाब भरो.
अपनी मंजिल खुद तय करो,
इस बेदर्द दुनिया से मत डरो.
जिन्हें हद से ज्यादा वक़्त दिया जाता है.
गिरना भी चाहता हूं….बस रुकना नहीं चाहता.
उससे भी ज़िन्दगी छोटी हो जाती है.
और “किस्मत” महलों में राज करती है!!
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। …!!!