मस्त विचार 1987
ढूंढ तो लेते तुम्हें हम, शहर में भीड़ इतनी भी न थी,
पर रोक दी तलाश हमने
क्योंकि तुम खोये नहीं थे, बदल गये थे.
पर रोक दी तलाश हमने
क्योंकि तुम खोये नहीं थे, बदल गये थे.
दूसरों की सदिया वीरान कर देते हैं.
_ दूसरा प्रकार वे हैं जिन्होंने काम किया लेकिन सोचा नहीं..
छलकती, बिखरती खुशियों को अक्सर नज़र लग जाती है.
जैसे वे हमसे फायदा उठाकर भी हम पर कोई अहसान कर रहें हों.
औरों की दिखती है पर अपनी नहीं.