मस्त विचार 2176
आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ
या काम करने के लिए जीता हूँ.
आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ
या काम करने के लिए जीता हूँ.
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया….
अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. ……
पैगाम लिखते-लिखते ख्वाब याद आ गए,
मिलने कि तमन्ना थी आपसे,
लेकिन आँसू में आप नज़र आ गए,
उसके साथ जिया जाता है,
उनके सुधार से परिस्थिति और बिगड़ जाती है.
‘स्वयं’ की गलती पर तो ‘वकील’ बनता है..और
‘दूसरों’ की ‘गलती’ पर सीधे ‘जज’ बन जाता है.
मैं तो मस्त मगन हुआ, तेरी शरण में ही सुख पाऊँगा.
एक तो मस्ती इस दुनिया की, पल- पल है भटकावे.
दूजी मस्ती प्रेम तेरे की, हर पल बढ़ती जावे.
बहुत निहारा इस दुनिया को, दर्द ना किसी का बाँटा.
तेरी एक नजर से मिट गयी, मेरे दुख की रेखा.
तुझसे पाकर प्यार अनूठा फिर ना किसी को देखा.
तेरे संग मगन हुआ इस दुनिया को, जग को भुला.