मस्त विचार 1988
खामोश रहने का अपना ही मज़ा है, _ नींव के पत्थर कभी बोला नहीं करते.
पर रोक दी तलाश हमने
क्योंकि तुम खोये नहीं थे, बदल गये थे.
दूसरों की सदिया वीरान कर देते हैं.
_ दूसरा प्रकार वे हैं जिन्होंने काम किया लेकिन सोचा नहीं..
छलकती, बिखरती खुशियों को अक्सर नज़र लग जाती है.
जैसे वे हमसे फायदा उठाकर भी हम पर कोई अहसान कर रहें हों.