मस्त विचार 2187
आँखो के पर्दे भी नम हो गए हैं , बातो के सिलसिले भी कम हो गए हैं.
पता नही गलती किसकी है, वक्त बुरा है या बुरे हम हो गए हैं .
पता नही गलती किसकी है, वक्त बुरा है या बुरे हम हो गए हैं .
_ आप के लिए सज़ा बन सकते हैं ..
आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।।
तस्वीर मे तो हर कोई मुस्कुराता है…
यही सोचकर की काश कोई अपना होता तो रोने ना देता.
“आपको गिरने का डर नही लगता ?
परिन्दे ने क्या गजब का जवाब दिया,
”मै इन्सान नही
जो ज़रा सी ऊँचाई पा कर अकड़ जाऊ..