मस्त विचार 1964
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़,
किसी की आँख में हम को भी इंतजार दिखे.
किसी की आँख में हम को भी इंतजार दिखे.
_यूँ चुप से क्यूँ हो ..अजी कुछ तो बोलिए..
…….बेहतरीन को खो देते हैं.
छोटी सी चादर से उम्मीदें बड़ी रखता हूँ…
क्योंकि, अपनों के बिना जीवन में सपनों का कोई मोल नहीं होता.
क्योंकि फिटकरी और मिश्री एक जैसे ही नजर आते हैं.