मस्त विचार 2105
लहजे में “बदजुबानी” चेहरे पे “नकाब” लिए फिरते हैं,
जिनके “खुद” के बही खाते बिगड़े हैं, वो मेरा हिसाब लिए फिरते हैं.
जिनके “खुद” के बही खाते बिगड़े हैं, वो मेरा हिसाब लिए फिरते हैं.
वे तो आपकी सरलता, प्रसिद्धि और समृद्धि के साथ ही जन्म ले चुके होते हैं…
हाँ हमें इनके बारे में पता तनिक देर से चलता है.
खुद तरक्की कर लो तो दुश्मनों का काफिला खड़ा हो जाएगा.
“कुछ ने दिये जलाये”…”और कुछ ने घर.”.
मांगी ही नहीं जाती, अब कोई दुआ हमसे…..
लेकिन उन्हें तो आप बदल ही सकतें हैं, जिनके इर्द गिर्द आप रहना चाहतें हैं.
*मैं तो अपने यकीन पर शर्मिन्दा हूँ*