मस्त विचार 2122
एक मुख्तसर सी वजह है मेरे झुक के मिलने की
मिट्टी का बना हूँ गुरूर जचता नहीं मुझ पर…
मिट्टी का बना हूँ गुरूर जचता नहीं मुझ पर…
*तुम सुनो ना सुनो,* *मै तुम्हे यूँही पुकारा करूँ…*
*तुम मिलो ना मिलों,* मै तुम्हे यूँही पाना चाहूँ….*
*तुम कहो ना कहो,* *मै तुम्हे यूँही सुना करूँ……*
*तुम देखो ना देखो,* *मै तुम्हे बस निहारा करूँ…*
अपने भीतर अपने आप को………”
मंजिल को दायरे से निकल कर तलाश कर.
सिर्फ सेहत के सहारे जिंदगी कटती नहीं.
अब दर्द न मिले तो दर्द सा होता है.