मस्त विचार 2032

कभी पास बैठो किसी फूल के,

सुनो जब ये महकता है, बहुत कुछ ये कहता है.

कभी गुनगुना के, कभी मुस्कुरा के.

कभी चुपके चुपके, कभी खिलखिला के.

मस्त विचार 2031

जीवन बांसुरी की तरह है,

जिसमे बाधाओं रूपी कितने भी छेद क्यों न हों,

लेकिन जिसे बजाना आ गया, उसे जीना आ गया.

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