मस्त विचार 1875
मेरी हस्ती ही नहीं थी तेरे बगैर,
तेरा सर पे हाथ रखना याद आता है,
मंजिल ही नहीं दिखती थी सफर में,
तेरा सही पथ दिखलाना याद आता है.
तेरा सर पे हाथ रखना याद आता है,
मंजिल ही नहीं दिखती थी सफर में,
तेरा सही पथ दिखलाना याद आता है.
कि वो तुम्हारे बगैर ही जीना सीख जाए.
गम देने वाला अपना ही हरदम होता है.
ये खुद से मिलने का बड़ा हसीन मौका है…!!
और बिना धोखे के ख़तम नहीं होते….
आप अपना ख़्याल तो रखिये !!