मस्त विचार 1991

अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो…

मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो…

मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना….!

मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो.

मस्त विचार 1990

अहम् से ऊँचा कोई आसमान नहीं.

किसी की बुराई करने जैसा आसान कोई काम नहीं.

“स्वयं” को पहचानने से अधिक कोई “ज्ञान” नहीं.

और “क्षमा” करने से बड़ा कोई “दान” नहीं.

लोग कहते है कि आदमी को अमीर होना चाहिए..

और हम कहते है कि आदमी का जमीर होना चाहिए..॥

मस्त विचार 1987

ढूंढ तो लेते तुम्हें हम, शहर में भीड़ इतनी भी न थी,

पर रोक दी तलाश हमने

क्योंकि तुम खोये नहीं थे, बदल गये थे.

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