मस्त विचार 1991
अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो…
मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो…
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना….!
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो.
मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो…
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना….!
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो.
किसी की बुराई करने जैसा आसान कोई काम नहीं.
“स्वयं” को पहचानने से अधिक कोई “ज्ञान” नहीं.
और “क्षमा” करने से बड़ा कोई “दान” नहीं.
लोग कहते है कि आदमी को अमीर होना चाहिए..
और हम कहते है कि आदमी का जमीर होना चाहिए..॥
दुसरो की उम्मीदों में उम्र गुजर जायेगी….
पर रोक दी तलाश हमने
क्योंकि तुम खोये नहीं थे, बदल गये थे.
दूसरों की सदिया वीरान कर देते हैं.