मस्त विचार 1972

मेरे अकेलेपन का मजाक बनाने वालों जरा ये तो बताओ,

जिस भीड़ में तुम खड़े हो…उसमें कौन तुम्हारा है.

मस्त विचार – मस्त है जिंदगी – 1968

खुश रह कर गुजारो तो मस्त है जिंदगी,

दुखी रह कर गुजारो तो त्रस्त है जिंदगी,

तुलना में गुजारो तो पस्त है जिंदगी,

इंतजार में गुजारो तो सुस्त है जिंदगी,

सीखने में गुजारो तो किताब है जिंदगी,

दिखावे में गुजारो तो बर्बाद है जिंदगी,

मिलती है एक बार, प्यार से बिताओ जिंदगी,

जन्म तो रोज होते हैं, यादगार बनाओ जिंदगी.

जिंदगी ऐसी ही है. हम कुछ नहीं जानते.

_हम किसी चीज़ को बुरा कहते हैं; अच्छा कहते हैं.

_लेकिन वास्तव में हम कुछ नहीं जानते..

जिंदगी एक यात्री की यात्रा की तरह है,

_ कुछ लोग जल्दी जा रहे हैं और कुछ देर से जाने वाले हैं..!!

**मस्त जिंदगी” वहीं से शुरू होती है,

_जहां हम खुद से झूठ बोलना बंद कर देते हैं.!!
“मस्त जिंदगी लग्जरी [Luxury] नहीं, स्पष्टता [Clarity] का नाम है.”
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