मस्त विचार – मन का अफसाना है – 1947
सुख दुख मन का अफसाना है.
वैसे अकेले ही आये है और अकेले ही जाना है,
कैसा भी हो बंधन एक दिन तो टूट जाना है,
कोई कितना भी रहे पास या कितना भी रहे दूर,
सुख दुख का जलवा अपने ही मन का अफसाना है.
वैसे अकेले ही आये है और अकेले ही जाना है,
कैसा भी हो बंधन एक दिन तो टूट जाना है,
कोई कितना भी रहे पास या कितना भी रहे दूर,
सुख दुख का जलवा अपने ही मन का अफसाना है.
इम्तहान ले रहा है वो कुछ तो कुसूर रहा होगा ..,,
अपने ही घर से निकलता हूँ, अपने ही घर की तलाश में………
ये दुनिया है, इसे तो कुछ न कुछ होने से मतलब है.
तो मालूम नहीं था एक दिन इस फोन में ज़िंदगी सिमटती चली जायेगी।।।