मस्त विचार – सब कुछ किसी को नहीं मिलता – 1953
गुलाब के पास सुगंध है तो चमक नहीं,
सोने के पास चमक है तो सुगंध नहीं,
कोयल के पास कंठ है पर सौंदर्य नहीं,
मोर के पास सौंदर्य है पर कंठ नहीं,
कुछ न कुछ कम या अधूरा रह ही जाता है.
गुलाब के पास सुगंध है तो चमक नहीं,
सोने के पास चमक है तो सुगंध नहीं,
कोयल के पास कंठ है पर सौंदर्य नहीं,
मोर के पास सौंदर्य है पर कंठ नहीं,
कुछ न कुछ कम या अधूरा रह ही जाता है.
नाकामियों को अपनी संवारते ही रहे हम.
खंडहरों में जिंदगी तलाशते ही रहे हम.
उठते रहें हैं अक्सर तूफां बीती यादों के.
सुबह शाम यादों को बुहारते ही रहे हम.
न की परवा किसी ने रत्तीभर भी हमारी.
मारे दर्द के दिन रात कराहते ही रहे हम.
अपनी मदद को कोई इक बार भी न आया.
पुकारने को तो सब को पुकारते ही रहे हम.
जब वक़्त पड़ा हम पर, सब मुहं मोड़ बैठे.
रिश्तों की पोटली को संभालते ही रहे हम.
“वक़्त जाता रहा”
औकात बस इतनी देना कि, औरों का भला हो जाए,
रिश्तो में गहराई इतनी हो कि, प्यार से निभ जाए,
आँखों में शर्म इतनी देना कि, बुजुर्गों का मान रख पायें,
साँसे पिंजर में इतनी हों कि, बस नेक काम कर जाएँ,
बाकी उम्र ले लेना कि, औरों पर बोझ न बन जाएँ.
_मेरी बिखरी हुई जिंदगी किसी को नहीं दिखती..!!
_जहाँ देखता हूँ तू बिखरी नज़र आती है..!!
जो कठिनाई में अपनी राह निकालता है.
_ वो दूर हो जाएँ तो रुला देते हैं।।