मस्त विचार 1773
ना किसी से ईर्ष्या ना किसी से कोई होड़,
मेरी अपनी मंज़िलें मेरी अपनी दौड़.
मेरी अपनी मंज़िलें मेरी अपनी दौड़.
जिनको इन्सान समझते थे वो पत्थर निकले…
क्या मिला तुझको इस तरह मेरे मन में घाव करके.
लोग पी जाते अगर समंदर खारा न होता.
उस समय भी समय गुजर रहा होता है.
दुनिया में छोड़ने जैसा कुछ है तो दुसरों से उम्मीद करना छोड़ दो.