मस्त विचार 1762

जिंदगी का राज तन्हाई में पा लिया…..

जिसका भी गम मिला उसे अपना बना लिया…..

पर जब हमारा गम सुनने को नहीं मिला कोई….

तो सामने रखा आईना और खुद को ही सुना लिया…..

मस्त विचार 1759

“कमाल” करते हैं हमसे जलन रखने वाले,

“महफिलें” खुद की सजाते हैं और चर्चे हमारे करते हैं.

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