मस्त विचार 1762
जिंदगी का राज तन्हाई में पा लिया…..
जिसका भी गम मिला उसे अपना बना लिया…..
पर जब हमारा गम सुनने को नहीं मिला कोई….
तो सामने रखा आईना और खुद को ही सुना लिया…..
जिसका भी गम मिला उसे अपना बना लिया…..
पर जब हमारा गम सुनने को नहीं मिला कोई….
तो सामने रखा आईना और खुद को ही सुना लिया…..
हमने भी उन लोगों से मिलना- जुलना छोड़ दिया.
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं.
“महफिलें” खुद की सजाते हैं और चर्चे हमारे करते हैं.
जब सब मुहं फेर लेते हैं तो खुदा साथ देता है.
मुट्ठी भी खाली रहेगी जब पहुँचोगे घाट पर.