मस्त विचार 1949
मनुष्य वही श्रेष्ठ माना जाएगा,
जो कठिनाई में अपनी राह निकालता है.
जो कठिनाई में अपनी राह निकालता है.
_ वो दूर हो जाएँ तो रुला देते हैं।।
वैसे अकेले ही आये है और अकेले ही जाना है,
कैसा भी हो बंधन एक दिन तो टूट जाना है,
कोई कितना भी रहे पास या कितना भी रहे दूर,
सुख दुख का जलवा अपने ही मन का अफसाना है.
इम्तहान ले रहा है वो कुछ तो कुसूर रहा होगा ..,,
अपने ही घर से निकलता हूँ, अपने ही घर की तलाश में………