मस्त विचार 2008
कभी चाहता था …. ज़िन्दगी मेरे घर आना,
अब ये है कि …. ज़िन्दगी आ रहा हूँ मैं.
अब ये है कि …. ज़िन्दगी आ रहा हूँ मैं.
जो उनसे नफरत करते हैं, उनका काम गंदगी और कचरा पैदा करना है.
_ खुद को, और अधिक बेहतर बनाने की !!
मगर ये सब, मुमकिन नहीं हवाओं से रिश्ता किये बगैर.
ये नमक का शहर है.