मस्त विचार 1990

अहम् से ऊँचा कोई आसमान नहीं.

किसी की बुराई करने जैसा आसान कोई काम नहीं.

“स्वयं” को पहचानने से अधिक कोई “ज्ञान” नहीं.

और “क्षमा” करने से बड़ा कोई “दान” नहीं.

लोग कहते है कि आदमी को अमीर होना चाहिए..

और हम कहते है कि आदमी का जमीर होना चाहिए..॥

मस्त विचार 1987

ढूंढ तो लेते तुम्हें हम, शहर में भीड़ इतनी भी न थी,

पर रोक दी तलाश हमने

क्योंकि तुम खोये नहीं थे, बदल गये थे.

मस्त विचार 1985

असफल लोग दो तरह के होते हैं, – एक प्रकार वे हैं जिन्होंने काम के बारे में सोचा लेकिन काम नहीं किया_

_ दूसरा प्रकार वे हैं जिन्होंने काम किया लेकिन सोचा नहीं..

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