मस्त विचार 1938
बहस सिर्फ यह सिद्ध करती है, “कौन सही है”
जबकी बातचीत यह तय करती है. कि “क्या सही है”
जबकी बातचीत यह तय करती है. कि “क्या सही है”
पर जीवन से कभी नहीं हारना चाहिए.
उसके बाद मुझे कोई अजनवी न मिला.
लेकिन दूसरों पर निर्भर नहीं करती.
जब लोग बदल सकते हैं तो किस्मत क्या चीज है.