मस्त विचार 1984
खुशियां उतनी ही अच्छी, जितनी मुट्ठियों में समां जाय.
छलकती, बिखरती खुशियों को अक्सर नज़र लग जाती है.
छलकती, बिखरती खुशियों को अक्सर नज़र लग जाती है.
जैसे वे हमसे फायदा उठाकर भी हम पर कोई अहसान कर रहें हों.
औरों की दिखती है पर अपनी नहीं.
दिल मचलता रहे लहरों की तरह, वैसा मिज़ाज़ चाहिए ।।
_ हर कोई यहाँ अपने भाग्य और अपनी हक़ीक़त बनाने में लगा है..!!
मग़रुर रहने का अंदाज हमेशा तन्हा कर देता है !!