मस्त विचार 1751
*दुआ* करना *दम* भी *उसी दिन* निकले…
*जिस दिन* *मेरे दिल* से *आप * निकले.!
*जिस दिन* *मेरे दिल* से *आप * निकले.!
लेकिन हाँ !!! अंदाजा तो लगाओ कभी अपने सुखों का.
मुहं से यही निकलेगा कि या रब शुक्र है तेरा.
…बेहतर ऑफर मिलते ही चेंज कर लेते हैं.
मै जब जब भी रोया….मेरे मुरशद को खबर हो गई..
वक़्त को दवा कहा और ख्वाहिशों से परहेज सुनाया.
नजदीकियां कितनी खास थी….!!