मस्त विचार 1864
प्यार की मोहताज़ है मेरी जिंदगी,
हस लेता हूँ लोगों को दिखाने के लिए,
वर्ना दर्द की किताब है मेरी जिंदगी.
प्यार की मोहताज़ है मेरी जिंदगी,
हस लेता हूँ लोगों को दिखाने के लिए,
वर्ना दर्द की किताब है मेरी जिंदगी.
थोड़ी सी तो प्यास अभी रहने दो.
चन्द चोटों से क्या घबराना,
मनुहार की आस अभी रहने दो.
तपते है कड़ी धूप में, झुलसते हैं,
तब डाल पर फूल कहीं खिलते हैं.
इन फूलों की खुशबु को,
फ़िजा में अभी तुम बिखरने दो.
बेशकीमती है ये आँसुओं के मोती,
अभी न इनको पलकों से बहने दो.
माना खुशी देती है, यादों की अविरल धारा,
क्या हासिल होता है, अतीत में डूबकर,
यादों के काफिलों को शहर से गुजरने दो.
खालीपन में अपनों से मिलकर,
प्रेम के मोती सजने दो.
कोरी आँखों मे ख्वाब भी नहीं आते,
इन आँखों की नमीं अभी रहने दो.
क्या पता कब आ जाये कोई थामने वाला,
काँधे पे सिर रख कर, फुट फुट कर,
गम का समन्दर बहने दो,
एहसास रहने दो, प्यास रहने दो ।।
।। पीके ।।
लेकिन हम तो अच्छे बनें, हमें किसने रोका है.
तब ज़िन्दगी के असली मायने समझ आते हैं.
थोड़ा “Late” जरूर होगा पर “Latest” होगा.
और, फोटो खिंचवाते वक़्त..*मैं अक्सर मुस्कुरा लिया करता हूँ..
क्यूँ नुमाइश करुँ..*अपने माथे पर शिकन की..*
मैं, अक्सर मुस्कुरा के..*इन्हें मिटा दिया करता हूँ..*
क्योंकि..*जब लड़ना है खुद को खुद ही से..
तो, हार-जीत में..*कोई फ़र्क नहीं रखता हूँ..*
हारुँ या जीतूं..* कोई रंज नहीं..*
कभी खुद को जिता देता हूँ..* तो, कभी खुद से जीत जाता हूँ..*
ज़िंदगी तुम बहुत खूबसूरत हो..*
इसलिए मैंने तुम्हें..* सोचना बंद और..* जीना शुरु कर दिया है..*