मस्त विचार 1696
थोड़ी सी इबादत बहुत सा सिला देती है,
गुलाब की तरह चेहरा खिला देती है,
*दोस्तों* की याद को दिल से जाने न देना,
कभी कभी छोटी सी दुआ अर्श हिला देती है.
गुलाब की तरह चेहरा खिला देती है,
*दोस्तों* की याद को दिल से जाने न देना,
कभी कभी छोटी सी दुआ अर्श हिला देती है.
क्योंकि हर कोई, सब कुछ नही जानता,
लेकिन हर एक कुछ ना कुछ ज़रुर जानता है.
सिर्फ ये जानने के लिए…कि नजदीक कौन है…
मंजिल तो बस वहीँ हैं, जहाँ ख्वाहिशें थम जाएं.
लेकिन उसके ख्वाब बड़े होने चाहिए.
उसके साथ खड़े रहने से अच्छा हैं, अकेले खड़ा रहना.