मस्त विचार 1896

आँसू जानते हैं कौन अपना है, तभी अपनों के आगे निकलते हैं,

मुस्कुराहट का क्या है, गैरों से भी वफा कर लेती है.

मस्त विचार 1895

किस्मत ने जैसा चाहा वैसे ढल गए हम,

बहुत संभल के चले फिर भी फिसल गए हम,

किसी ने विश्वास तोड़ा तो किसी ने दिल,

और लोगों को लगा की बदल गए हम.

मस्त विचार 1892

जब तक सांस है, टकराव मिलता रहेगा.

जब तक रिश्ते हैं, “घाव” मिलता रहेगा.

पीठ पीछे जो बोलते हैं, उन्हें पीछे ही रहने दें,

अगर हमारे कर्म, भावना और रास्ता सही है.

तो गैरों से भी “लगाव” मिलता रहेगा.

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