मस्त विचार 1896
आँसू जानते हैं कौन अपना है, तभी अपनों के आगे निकलते हैं,
मुस्कुराहट का क्या है, गैरों से भी वफा कर लेती है.
मुस्कुराहट का क्या है, गैरों से भी वफा कर लेती है.
बहुत संभल के चले फिर भी फिसल गए हम,
किसी ने विश्वास तोड़ा तो किसी ने दिल,
और लोगों को लगा की बदल गए हम.
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए.
जिसे जी लिया उसे ज़िंदगी कहिए..
जब तक रिश्ते हैं, “घाव” मिलता रहेगा.
पीठ पीछे जो बोलते हैं, उन्हें पीछे ही रहने दें,
अगर हमारे कर्म, भावना और रास्ता सही है.
तो गैरों से भी “लगाव” मिलता रहेगा.