मस्त विचार 1733
मैं कभी हँसता खेलता भी था,
एक पुरानी तस्वीर में, देखा है आज खुद को.
एक पुरानी तस्वीर में, देखा है आज खुद को.
जबकि बनाने और मनाने में पूरा जीवन लग जाता है.
निखरो फूलों की तरह और बिखरो “खुशबू की तरह”.
भरोसे पे शक है और अपने शक पे भरोसा है.
बल्कि अच्छा बनने के लिए जीओ.
वक़्त आने पर बता देगा, किसका कौन है !!