मस्त विचार 1715
चलो चलकर सुकून ही ढूंढ लाएं,
ख्वाहिशें तो ख़त्म होने से रहीं.
ख्वाहिशें तो ख़त्म होने से रहीं.
गम खाली थे ठहर गये…
क्योंकि वे अपने भ्रम को टूटने नहीं देना चाहते.
“पाँव” भले ही “फिसल” जाये पर “जुबान” को कभी मत फिसलने देना..
बेगुनाहों के पास….सबूत कम पड़ जाते हैं.
महसूस ना करो तो बढ़ती कहाँ है …