मस्त विचार 1854
तेरे पास में आकर ख़ुशी से फूल जाता हूँ,
गम चाहे कैसा भी हो मै आकर भूल जाता हूँ.
गम चाहे कैसा भी हो मै आकर भूल जाता हूँ.
इश्क़ एक इबादत है, कारोबार नहीं….
सब ने सोच लिया मुझे तकलीफ़ नहीं होती.
नज़र उठाओ सामने ज़िंदगी खड़ी है.
नदियों को बहने के लिए किसी, पथ की जरूरत नहीं होती.
जो बढ़ते हैं जमाने में, अपने मजबूत इरादों के बल,
उन्हें अपनी मंजिल पाने के लिए, किसी रथ की जरूरत नहीं होती.
चिरागों के जलते ही…बुझा दी जाती हैं “तीलियाँ”.