मस्त विचार 1831
आसमाँ के चाँद के हकदार हैं हम,
यूँ खिलौनों से न बहलाया करो तुम.
सब्र कर जुल्मी की शामत भी आती होगी,
_ तेरी ये पुकार आसमां तक भी जाती होगी..!!
यूँ खिलौनों से न बहलाया करो तुम.
_ तेरी ये पुकार आसमां तक भी जाती होगी..!!
_ जो चल रहा है _ जैसा चल रहा है _ सब सही है..
_ ठहरे हुए लोग बस दूसरों पर उंगली उठाना जानते हैं.!!
_ वरना पसंद तो कोई भी किसीको भी कर लेता है..
_ लोग वहीं है दुनिया में, पर दिल बदल गए हैं !!
मनाते जो नहीं हो तो सताते क्यों नही हो तुम.