मस्त विचार 1831

आसमाँ के चाँद के हकदार हैं हम,

यूँ खिलौनों से न बहलाया करो तुम.

सब्र कर जुल्मी की शामत भी आती होगी,

_ तेरी ये पुकार आसमां तक भी जाती होगी..!!

मस्त विचार 1830

मन ख्वाहिशों मे अटका रहा, और ज़िन्दगी मुझे जी कर* *चली गई.
लगता है ..जैसे मेरा जीवन ..जिंदगी के किन्ही बहुत खूबसूरत ..बीते हुए पलों में ..अटका हुआ है..!!

मस्त विचार 1829

अब उम्मीदें छोड़ दी हैं मैंने सबसे ; _

_ जो चल रहा है _ जैसा चल रहा है _ सब सही है..

जो चल रहा और आगे बढ़ रहा है, वही कभी ना कभी गिरता भी है,

_ ठहरे हुए लोग बस दूसरों पर उंगली उठाना जानते हैं.!!

मस्त विचार 1828

खुश किस्मत होते है वो जो तलाश बनते है किसी की, _

_ वरना पसंद तो कोई भी किसीको भी कर लेता है..

मस्त विचार 1826

हमें बिल्कुल नही भाता तुम्हारा मौन यूँ रहना,

मनाते जो नहीं हो तो सताते क्यों नही हो तुम.

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