मस्त विचार 1772
हम जो ओढे हुए अहसास की चादर निकले…
जिनको इन्सान समझते थे वो पत्थर निकले…
जिनको इन्सान समझते थे वो पत्थर निकले…
क्या मिला तुझको इस तरह मेरे मन में घाव करके.
लोग पी जाते अगर समंदर खारा न होता.
उस समय भी समय गुजर रहा होता है.
दुनिया में छोड़ने जैसा कुछ है तो दुसरों से उम्मीद करना छोड़ दो.
कुछ लोग तो दूसरों की खुशियाँ देख कर भी बीमार हो जाते हैं.