मस्त विचार 1638
सोचने से कहां मिलते हैं तमन्ना के शहर,
चलने की जिद्द भी जरुरी है, मंजिलों के लिए.
चलने की जिद्द भी जरुरी है, मंजिलों के लिए.
आप मीठा बोलकर भी लोगों को खुशियाँ दे सकते हैं…….!!!!!
अब दूर से पूछोगे तो ख़ैरियत ही लिखेंगे.
आप अकेले आनन्दित हो सकते है; परन्तु उत्सव नहीं मना सकते.
अकेले आप मुस्करा तो सकते है; परन्तु हर्षोल्लास नहीं मना सकते.
हम सब एक दूसरे के बिना कुछ नहीं हैं; यही रिश्तों की खूबसूरती है.
शर्त है कि पहले जी भर के अँधेरा तो देख.
काश कोई तो मेरी नजर से भी देखता मुझको.