मस्त विचार 1834

हर कोई अपना भाग्य बनाने में लगा है,

और दुर्भाग्य ये कि भाग्य से जो मिला है उसे जी नही पा रहा.

मस्त विचार 1833

आज तुम्हारे पास वही है, जिसके लिए तुमने प्रयास किया,

और इससे पहले तुम्हारी नई माँग की लहर इसको डुबा दे … इसे जी लो.

मस्त विचार 1832

“नाम” और “बदनाम” में क्या फर्क है ?

नाम” खुद कमाना पड़ता है “बदनामी” लोग आपको कमा के देते हैं.

मस्त विचार 1831

आसमाँ के चाँद के हकदार हैं हम,

यूँ खिलौनों से न बहलाया करो तुम.

सब्र कर जुल्मी की शामत भी आती होगी,

_ तेरी ये पुकार आसमां तक भी जाती होगी..!!

मस्त विचार 1830

मन ख्वाहिशों मे अटका रहा, और ज़िन्दगी मुझे जी कर* *चली गई.
लगता है ..जैसे मेरा जीवन ..जिंदगी के किन्ही बहुत खूबसूरत ..बीते हुए पलों में ..अटका हुआ है..!!
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