मस्त विचार 1760
इतने हिस्से में बंट गया हूँ मैं,
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं.
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं.
“महफिलें” खुद की सजाते हैं और चर्चे हमारे करते हैं.
जब सब मुहं फेर लेते हैं तो खुदा साथ देता है.
मुट्ठी भी खाली रहेगी जब पहुँचोगे घाट पर.
मुस्कुराया कीजिए बड़ा अच्छा लगता है.
और तैयार सदा असफलता के लिए रहो,
तो आप जीवन में कभी निराश नही होओगे.